Column : Bhula Do Author : Ankit Kumar Aggarwal 1 ) अरे आज़ादी की खुशी से हुआ मे वाकिफ़ आज इन हसीन नज़ारो को आँखों मे बसाना है. मंज़िल तो दूर ही है मुझसे लेकिन रास्ते का मज़ा उठना है काफिला शुरू से ही था अकेला लोग मिलकर बिछड़ते गये जो चलना चाहे साथ उसे लक्ष्य तक पहुचना है!!!! 2) दफ़न कर उस शख्स को जिसे तेरी परवाह नही, रख बस राख उसकी जिससे तुझे कोई गीला नही, आख़िर तेरा प्यार तो उसकी यादों मे है वो इंसान थी क्या ये तो तुझे अभी भी मालूम नही!!!!!! 3) मेरा फलसफा,,,,,,,,,,,, उन रस्तो से पूछो जिनपे मे चल था कभी उन अक्षरो से पूछो जिनको मेने कहा था कभी जाकर उन नग्मो से पूछो जिन्हे मे गुनगुनाता था कभी और अगर ये न्ही कर सकते तुम दोस्त तो उस आसमान से पूछो .................................................. जो रोकर सुना रहा है मेरे अल्फ़ाज़ अभी.... 4) तेरे लब्जों का रहता है इंतेजार मुझे चाहत मे तेरी हमेशा बेकरार रहे तुझको मानता प्यार की तस्वीर ये मन तस्वीर क्या तुझे अपनी तकदीर मानता हूँ जब निकले ये चाँदनी से नाहकर चाँद मे नही होता हैरान क्...