Column : Bhula Do Author : Ankit Kumar Aggarwal इन भीगी हुई ऱाहो मे चलते हुए अभी सोचा मैने बह रहे है अश्क मेरे जाने हुआ ये कैसा इस जिंदगी मे हुए क्यूँ खफा सब शख्स मेरे जुदा होने का गुबार छुपाना भी आसान नही लेकिन छुपा कर भी होगा क्या हासिल मंज़िलो पे पहुचना भी है आसान अगर हो साथ मे किसी का साथ अकेले चलकर मुकाम पाने वालो को नही होती है वो खुशी नसीब खुशी तो है उसको जिसने किया दोस्तो के साथ सब हासिल खैर इन रस्तो की भी अपनी एक किस्मत है कोई इन पर चलकर रोता है तो कभी ये खुद किसी के लिए रोते है शायद आज!!!!!!!!! ये नादान मुझपे ही आँसू बहा रहा है कोई समझाओ इसे मैं अभी भी खुश ही हू ये तो असमा यूही मुझे सालामी देता है....
I THINK THEREFORE I AM