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सालामी

Column : Bhula Do Author :  Ankit Kumar Aggarwal इन भीगी हुई ऱाहो मे चलते हुए अभी सोचा मैने बह रहे है अश्क मेरे जाने हुआ ये कैसा इस जिंदगी मे हुए क्यूँ खफा सब शख्स मेरे जुदा होने का गुबार छुपाना भी आसान नही लेकिन छुपा कर भी होगा क्या हासिल मंज़िलो पे पहुचना भी है आसान अगर हो साथ मे किसी का साथ अकेले चलकर मुकाम पाने वालो को नही होती है वो खुशी नसीब खुशी तो है उसको जिसने किया दोस्तो के साथ सब हासिल खैर इन रस्तो की भी अपनी एक किस्मत है कोई इन पर चलकर रोता है तो कभी ये खुद किसी के लिए रोते है शायद आज!!!!!!!!! ये नादान मुझपे ही आँसू बहा रहा है कोई समझाओ इसे मैं अभी भी खुश ही हू ये तो असमा यूही मुझे सालामी देता है....

कुछ अनकहे लब्ज

Column  : Bhula Do Author :  Ankit Kumar Aggarwal 1 ) अरे आज़ादी की खुशी से हुआ मे वाकिफ़ आज इन हसीन नज़ारो को आँखों मे बसाना है. मंज़िल तो दूर ही है मुझसे लेकिन रास्ते का मज़ा उठना है काफिला शुरू से ही था अकेला लोग मिलकर बिछड़ते गये जो चलना चाहे साथ उसे लक्ष्य तक पहुचना है!!!! 2) दफ़न कर उस शख्स को जिसे तेरी परवाह नही, रख बस राख उसकी जिससे तुझे कोई गीला नही, आख़िर तेरा प्यार तो उसकी यादों मे है वो इंसान थी क्या ये तो तुझे अभी भी मालूम नही!!!!!! 3) मेरा फलसफा,,,,,,,,,,,, उन रस्तो से पूछो जिनपे मे चल था कभी उन अक्षरो से पूछो जिनको मेने कहा था कभी जाकर उन नग्मो से पूछो जिन्हे मे गुनगुनाता था कभी और अगर ये न्ही कर सकते तुम दोस्त तो उस आसमान से पूछो .................................................. जो रोकर सुना रहा है मेरे अल्फ़ाज़ अभी.... 4) तेरे लब्जों का रहता है इंतेजार मुझे चाहत मे तेरी हमेशा बेकरार रहे तुझको मानता प्यार की तस्वीर ये मन तस्वीर क्या तुझे अपनी तकदीर मानता हूँ जब निकले ये चाँदनी से नाहकर चाँद मे नही होता हैरान क्...

परख

Column  : Bhula Do Author :  Ankit Kumar Aggarwal परखते रहे वो हमे सारी ज़िंदगी, ओर हम इम्तिहान देते रहे, मज़ा आ रहा था उन्हे हमारी आँसुओ की बारिश मे, और हम भी उनके लिए बिना रुके रोते रहे, बेदर्द थे वो कुछ इस कदर, नींद हमारी उड़ाकर खुद चैन से सोते रहे, जिन्हे पाने के लिए हमने सब कुछ लूटा दिया, वो हमे हर कदम पर खोते रहे, ओर एक दिन जब हुआ इस का एहसास उन्हे, वो हमारे पास आकर पूरे दिन रोते रहे, ओर हम भी इतने ख़ुदग़र्ज़ निकले यारो, की आँखे बंद कर कफ़न मे सोते रहे.....!!!!! Column : Bhula Do Author : Ankit Kumar Aggarwal

जिंदगी

Column : Bhula Do Author : Ankit Kumar Aggarwal तुमको पता है लाश डूबती क्यूँ नही, क्यूँकी ए दोस्त डूबने क लिए भी जिंदगी चाहये.!!! मिली है जिंदगी तो इसकी इज्ज़त रखो खुद खुश रहो और सबको खुश रखो इबादत इजाज़त मे यकीन नही है तो क्या जिंदगी मे तो यकीन रखो कल मिले या ना मिले ये सूरज आज तो रोशनी का दामन साथ रखो!!! याद रखना मेरे दोस्त : होता है अपनी आँख का आँसू भी बेवफा,, वो भी निकलता है तो किसी और के लिए.. .. .

परवाह

Column : Bhula Do Author : Ankit Kumar Aggarwal परवाह मुझे है कितनी तुम्हारी मेरे अश्को से तुम जान लो हक़ीकत के हम्मसाए से निकली ये कैसी सी रंगत इसे तुम पहचान लो वो कैसी इबादत वो कैसी कशिश थी मुझसे जो मुझसे वो जुड़ा कर रही थी ना जाने किस रास्ते पे चल रहा था ये सख्श काश तुमने पहचाना होता ये अक्स आख़िर मे वोही एक रह गया बस पूछो ना जाने कैसे जी गया करता रहा वो सितम से दोस्ती ओर युहि परवाह करते करते मर गया !!!!!!

तेरी सोच

तेरे शहर तेरी सोच से निकल जाऊंगा, किसी उदास शाम में ढल जाऊंगा, तू जो मुकर गया है हर बात से अपनी, देख लेना एक दिन मैं भी बदल जाऊंगा, मत दिखा मुझ को अपना ये मासूम चेहरा, जब के तू जनता है में पिघल जाऊंगा, चाहे लाख तड़प लूं तेरे इंतज़ार में, मत लौट के आना मैं संभल जाऊंगा, तेरा होना इतना ज़रूरी तो नहीं है, मैं तो यादों के खिलोने से बेहल जाऊंगा। column : Bhula Do Author : Ankit Kumar Aggarwal

Letters still Pending

@Letters author : kamal bhatt  column  : kamal ki kalam se. blog :  Aangan Ke Geet जो औरों को लिखे ...सब गलत हाथों मे गए . । और खुद को जितनी भी चिट्ठीयां लिखी..एक भी नहीं मिली । !) ख्वाहिशें मरने को आ गई है.. अब भी प सुस्त ना हुई| 2)जिल्द भी चूहे कतर जाते है ..नेम चिट भी उल्टी चिपक गई है पन्ने भी पलटते .. गर तू इतनी मोटी ना होती रे... जिन्दगी ! तुझे अल्मारी में सहेज के रखा है के जिस रोज अनपड़ हो जाएगें तेरी भी सुनेंगे । 3)दाड़िम के पेड़ के किसी छेद मे छुपाकर रखी हैं अठन्नी गोल गोल बिल्कुल चांदी सी चमक रही है । अब इसको मिलाकर भी जिन्दगी ना मिले तो सौदे में घाटा ही होगा मुझको । 4)तेरी तस्वीर वालपेपर में थी जब.. शब लैप्टाप पर ही आंख लग जाती थी । 5) चिट्ठीए नि... दर्द फ़िराक वालिये | Sent Mails : 35 Inbox : 1 Drafts : 78 6) मुश्किल-ए-जिन्दगी कोयल गा रही थी.. मैं देख रहा था । 7)मै बातों के बीच के सन्नाटे मे व्यस्त था। और मुहं टपटपाने से जो आवाजें...कहते है कि बड़ी बड़ी बातें निकली... उन्हें सुनकर देर तक हंसा करते थे । 8)सिरे से पढ़ी.... एक एक खबर, चटखार...