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इत राग..


author: kamal bhatt
column : kamal ki kalam se...

 
..इत राग.. इत मास ..कौन गाए....!!
कौन मल्हार सुनाए.....
रात सिरहाने रात पूरी भीग रही थी......
शरद की चांदनी खड़ी बाल बिख्रराए..........


सौंदर्य तेरा तू जाने..तु ही पहचाने
परिधान तेरा कवन बतलाए......!!
क्षितिज समान जो दि्खता सबको


देखने वालो...!...
फ़ैलाकर हर शाम वो बाहो मेसमाए...
जो प्यास अधर की सहन कर सको....
 नीर नयन मे फिर डूबता जाए..!

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